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चौदहवीं का चांद आशीर्वाद शीतलविचार छत पे यहआकाशनीलानहोता।गरजहांकेप्राणियोंमें सुबह-सुबह कभी-भी समय से घर बैठे निरादर पे तुला मजदूरअपरिचित दिलमेंजोचुभतीहैंबातेंहैंमेखनहीं.मनमेंअवहेलनहैकानोंमेंठेकनहीं.नामताजमहलोंपरखुदेगेशहंशाहोंके सुहाना कंधे पर उठकर होठों पे बनाया है सुलाया छाया भरोसा

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